होने वाले ख़ुद ही अपने हो जाते हैं.. किसी को कहकर, अपना बनाया नही जाता..!!
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
उदास हूँ पर तुझसे नाराज़ नहीं तेरे दिल मे हूँ पर तेरे पास नहीं वैसे तो सब कुछ आ मेरे पास पर तेरे जैसा कोई खास नहीं
मायने खो देते हैं वो जवाब, जो वक्त पर नहीं मिलते !!
अगर आंसुओं की कीमत होती तो कल रात वाला तकिया अरबों का होता
रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .
होने वाले ख़ुद ही अपने हो जाते हैं.. किसी को कहकर, अपना बनाया नही जाता..!!
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
उदास हूँ पर तुझसे नाराज़ नहीं तेरे दिल मे हूँ पर तेरे पास नहीं वैसे तो सब कुछ आ मेरे पास पर तेरे जैसा कोई खास नहीं
मायने खो देते हैं वो जवाब, जो वक्त पर नहीं मिलते !!
अगर आंसुओं की कीमत होती तो कल रात वाला तकिया अरबों का होता
रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .