कोई अपना सा क्या लगा एक बार, किस्मत ने तो बुरा ही मान लिया

कोई अपना सा क्या लगा एक बार, किस्मत ने तो बुरा ही मान लिया

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एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से

पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ

कभी जिंदगी के धागे टूट जाए तो हमारे पास आना..हम हौसलों के दर्जी है मुफ्त में रफू करते हैं....|

बहुत जल्दी भरोसा कर रहे हो, कभी पहले टूटा नहीं क्या?

एक दिन हम सब एक दूसरे को सिर्फ यह सोचकर खो देगे की वो मुझे याद नहीं करता तो मे क्यों करू .

गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह ना हमे फुरसत मिली ना उन्हे ख्याल आया .

एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से

पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ

कभी जिंदगी के धागे टूट जाए तो हमारे पास आना..हम हौसलों के दर्जी है मुफ्त में रफू करते हैं....|

बहुत जल्दी भरोसा कर रहे हो, कभी पहले टूटा नहीं क्या?

एक दिन हम सब एक दूसरे को सिर्फ यह सोचकर खो देगे की वो मुझे याद नहीं करता तो मे क्यों करू .

गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह ना हमे फुरसत मिली ना उन्हे ख्याल आया .