मेरे दिल से खेल तो रहे हो तुम पर...... जरा सम्भल के...... ये थोडा टूटा हुआ है कहीं तुम्हे ही लग ना जाए
जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......
कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिये, दिल तो बस एक खिलौना है जमाने के लिये
बेवजह हाल कोई नहीं पूछता आज कल, हर बात की एक वजह होती है आज कल।
शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .
मेरे दिल से खेल तो रहे हो तुम पर...... जरा सम्भल के...... ये थोडा टूटा हुआ है कहीं तुम्हे ही लग ना जाए
जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......
कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिये, दिल तो बस एक खिलौना है जमाने के लिये
बेवजह हाल कोई नहीं पूछता आज कल, हर बात की एक वजह होती है आज कल।
शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .