कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

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उस हस्ती तस्वीर को क्या मालूम, उसे देखकर कितना रोया जाता है

खामोश रहना ही बेहतर है लफ्ज़ो के अक्सर लोग गलत मतलब निकाल लेते है.

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया

बेवजह हाल कोई नहीं पूछता आज कल, हर बात की एक वजह होती है आज कल।

कोई तो होगा टूटा हुआ मेरी तरह ही जो, जुड़ने की ख्वाहिश लिए जी रहा होगा अकेला कही.याद वो नहीं जो अकेले में आये, याद वो है जो महफिल में आये और अकेला कर जाए ||

गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह ना हमे फुरसत मिली ना उन्हे ख्याल आया .

उस हस्ती तस्वीर को क्या मालूम, उसे देखकर कितना रोया जाता है

खामोश रहना ही बेहतर है लफ्ज़ो के अक्सर लोग गलत मतलब निकाल लेते है.

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया

बेवजह हाल कोई नहीं पूछता आज कल, हर बात की एक वजह होती है आज कल।

कोई तो होगा टूटा हुआ मेरी तरह ही जो, जुड़ने की ख्वाहिश लिए जी रहा होगा अकेला कही.याद वो नहीं जो अकेले में आये, याद वो है जो महफिल में आये और अकेला कर जाए ||

गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह ना हमे फुरसत मिली ना उन्हे ख्याल आया .