कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

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क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?

एक सवाल था तुझसे क्या तुझे सच मैं प्यार था मुझसे.

ग़म इस बात का नहीं की आप मिल न सकेंगे, दर्द इस बात का है की हम आपको भुला न सकेंगे

पहले चुभा बहुत अब आदत सी हैं, ये दर्द पहले था अब इबादत सी हैं |

तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है

उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?

क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?

एक सवाल था तुझसे क्या तुझे सच मैं प्यार था मुझसे.

ग़म इस बात का नहीं की आप मिल न सकेंगे, दर्द इस बात का है की हम आपको भुला न सकेंगे

पहले चुभा बहुत अब आदत सी हैं, ये दर्द पहले था अब इबादत सी हैं |

तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है

उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?