कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता

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काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...

पहले चुभा बहुत अब आदत सी हैं, ये दर्द पहले था अब इबादत सी हैं |

माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं

बडा गजब कीरदार है मोहब्बत का, अधूरी हो सकती है पर ख़त्म नहीं....

रिश्ते नाते सब मतलब के यार है, बस पैसा ही सबका सच्चा प्यार है.

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है

काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...

पहले चुभा बहुत अब आदत सी हैं, ये दर्द पहले था अब इबादत सी हैं |

माफ़ी गलती की होती है, ज़िंदा लाश बनाने की नहीं

बडा गजब कीरदार है मोहब्बत का, अधूरी हो सकती है पर ख़त्म नहीं....

रिश्ते नाते सब मतलब के यार है, बस पैसा ही सबका सच्चा प्यार है.

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है