समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...
पहले चुभा बहुत अब आदत सी हैं, ये दर्द पहले था अब इबादत सी हैं |
काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..
मेरी आंखे देखकर लोग कहते हैं लगता है तेरा चाहने वाला तुझे आजमाता बहुत है
मेरी जेब मे जरा सा छेद क्या हो गया, सिक्को से ज्यादा तो रिश्ते गिर गए .
जब से वो मशहूर हो गये हैं, हमसे कुछ दूर हो गये हैं…
समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...
पहले चुभा बहुत अब आदत सी हैं, ये दर्द पहले था अब इबादत सी हैं |
काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..
मेरी आंखे देखकर लोग कहते हैं लगता है तेरा चाहने वाला तुझे आजमाता बहुत है
मेरी जेब मे जरा सा छेद क्या हो गया, सिक्को से ज्यादा तो रिश्ते गिर गए .
जब से वो मशहूर हो गये हैं, हमसे कुछ दूर हो गये हैं…