तुम बदले तो हम भी कहां पुराने से रहे, तुम आने से रहे तो हम भी बुलाने से रहे.

तुम बदले तो हम भी कहां पुराने से रहे, तुम आने से रहे तो हम भी बुलाने से रहे.

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आंधी आती है, तो पेड़ से पत्ते टूट जाते है नया बाबू मिलते ही पुराने छूट जाते हैं

तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है

शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था

चलो अब जाने भी दो....क्या करोगे दास्तां सुनकर,,, ख़ामोशी तुम समझोगे नही....और बयां हमसे होगा नही

उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..

आंधी आती है, तो पेड़ से पत्ते टूट जाते है नया बाबू मिलते ही पुराने छूट जाते हैं

तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ

कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है

शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था

चलो अब जाने भी दो....क्या करोगे दास्तां सुनकर,,, ख़ामोशी तुम समझोगे नही....और बयां हमसे होगा नही

उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..