उँगलियाँ निभा रही हैं रिश्ते आजकल ज़ुबाँ से निभाने का वक्त कहाँ

उँगलियाँ निभा रही हैं रिश्ते आजकल ज़ुबाँ से निभाने का वक्त कहाँ

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कल जितनी हसरत थी तुझे पाने की आज उतनी हसरत है तुझे भूल जाने की

एक दिन हम सब एक दूसरे को सिर्फ यह सोचकर खो देगे की वो मुझे याद नहीं करता तो मे क्यों करू .

हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है

किसी के दिल का दर्द किसने देखा है, देखा है तो सिर्फ चेहरा देखा है, दर्द तो तन्हाई मे होता है, लेकिन इन तन्हाइयों मे लोगो ने हमे हसते हुए देखा है !

तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ

ग़म इस बात का नहीं की आप मिल न सकेंगे, दर्द इस बात का है की हम आपको भुला न सकेंगे

कल जितनी हसरत थी तुझे पाने की आज उतनी हसरत है तुझे भूल जाने की

एक दिन हम सब एक दूसरे को सिर्फ यह सोचकर खो देगे की वो मुझे याद नहीं करता तो मे क्यों करू .

हजारो मेहफिल है .. लाखो मेले है, पर जहा तुम नहीं वहा हम अकेले है

किसी के दिल का दर्द किसने देखा है, देखा है तो सिर्फ चेहरा देखा है, दर्द तो तन्हाई मे होता है, लेकिन इन तन्हाइयों मे लोगो ने हमे हसते हुए देखा है !

तुमसे गुस्सा होकर भी तुम्हे ही ढूंढा करता हूँ

ग़म इस बात का नहीं की आप मिल न सकेंगे, दर्द इस बात का है की हम आपको भुला न सकेंगे