गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई
खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं
जब मिलो किसी से तो ज़रा दूर का रिश्ता रखना बहुत तड़पते हैं अक्सर सीने से लगने वाले
मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी
हद है यार.. प्यार भी हम ही करे, निभाए भी हम ही और छोड़ कर वो चला जाए तो रोये भी हम ही..
बात वफाओं की होती तो कभी न हारते, बात नीसब की थी, कुछ ना कर सके |
गुल्लक की तरह था रिश्ता हमारा जब टूटा तब कीमत समझ में आई
खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं
जब मिलो किसी से तो ज़रा दूर का रिश्ता रखना बहुत तड़पते हैं अक्सर सीने से लगने वाले
मेरी याद क़यामत की तरह है एक दिन ज़रूर आएगी
हद है यार.. प्यार भी हम ही करे, निभाए भी हम ही और छोड़ कर वो चला जाए तो रोये भी हम ही..
बात वफाओं की होती तो कभी न हारते, बात नीसब की थी, कुछ ना कर सके |