शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है
कभी उसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा, इस कश्मकश में भूल गए, खुद का दिल कहाँ रखा..
सबका दिल रखने में, अक्सर मेरा दिल टूट जाता है.
उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है
कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता
शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है
कभी उसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा, इस कश्मकश में भूल गए, खुद का दिल कहाँ रखा..
सबका दिल रखने में, अक्सर मेरा दिल टूट जाता है.
उसे गजब का शौंक है हरियाली का, रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है
कुछ तो है तुझसे मेरा रिश्ता वर्ण कोई गैर इतना भी याद नहीं आता