समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...

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बस दिल उदास है वैसे तो ठीक हूँ मैं

मोहब्बत क्या है चलो दो लफ्ज़ो में बताते है तेरा मजबूर कर देना मेरा मजबूर हो जाना

नमक की तरह हो गयी है जिंदगी, लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं

तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है

जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते

अकेली रात .. बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो .

बस दिल उदास है वैसे तो ठीक हूँ मैं

मोहब्बत क्या है चलो दो लफ्ज़ो में बताते है तेरा मजबूर कर देना मेरा मजबूर हो जाना

नमक की तरह हो गयी है जिंदगी, लोग स्वादानुसार इस्तेमाल कर लेते हैं

तुम जो साथ हो तो दुनिया अपनी सी लगती है वरना सीने में सांस भी पराई लगती है

जान तक देने की बात करते हैं यह लोग सच कहु तो दिल से दुआ भी नहीं करते

अकेली रात .. बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो .