समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...

समेट कर सारे जज़्बात रख दिये सिरहाने थोड़े सुकून के हक़दार हम भी हैं...

Share:

More Like This

अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..

दिल मेरे सीने से चुरा रहा है कोई, दूर होकर भी याद आ रहा है कोई, हे खुदा मुझे उससे एक बार मिलादे, इंतज़ार मेरे लिए कर रहा है कोई !

उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से

बहुत शोक था दुसरो को खुश रखने का होश तब आया जब खुद को अकेला पाया

वो दूर होकर भी पास हैं हमारी नहीं है फिर भी ख़ास है

ना मुलाक़ात याद रखना, ना पता याद रखना, बस इतनी सी आरज़ू है, मेरा नाम याद रखना.

अजीब तरह से गुजर रही है ज़िंदगी .. सोचा कुछ, किया कुछ हुआ कुछ, मिला कुछ ..

दिल मेरे सीने से चुरा रहा है कोई, दूर होकर भी याद आ रहा है कोई, हे खुदा मुझे उससे एक बार मिलादे, इंतज़ार मेरे लिए कर रहा है कोई !

उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से, अब नयी दुनिया लाये कहाँ से

बहुत शोक था दुसरो को खुश रखने का होश तब आया जब खुद को अकेला पाया

वो दूर होकर भी पास हैं हमारी नहीं है फिर भी ख़ास है

ना मुलाक़ात याद रखना, ना पता याद रखना, बस इतनी सी आरज़ू है, मेरा नाम याद रखना.