कुछ कह गए, कुछ सह गए, कुछ कहते कहते रह गए..❗️ मै सही तुम गलत के खेल में, न जाने कितने रिश्ते ढह गए..‼️

कुछ कह गए, कुछ सह गए, कुछ कहते कहते रह गए..❗️ मै सही तुम गलत के खेल में, न जाने कितने रिश्ते ढह गए..‼️

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गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

क्या गिला करें उन बातों से​ ​क्या शिक़वा करें उन रातों से​​​ ​​कहें भला किसकी खता इसे हम​ ​​कोई खेल गया फिर से जज़बातों से

अब तो मोहब्बत भी सरकारी नौकरी जैसी लगती है, कम्बख्त ग़रीबों को तो मिलती ही नहीं

लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??

गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

क्या गिला करें उन बातों से​ ​क्या शिक़वा करें उन रातों से​​​ ​​कहें भला किसकी खता इसे हम​ ​​कोई खेल गया फिर से जज़बातों से

अब तो मोहब्बत भी सरकारी नौकरी जैसी लगती है, कम्बख्त ग़रीबों को तो मिलती ही नहीं

लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??