जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....
तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती
मेरे ज़ज्बात की कदर ही कहाँ, सिर्फ इलज़ाम लगाना ही उनकी फितरत है !!
नींद आएगी तोह इस तरह सोयेंगे मुझे जगाने के लिया लोग रोयेंगे
शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है
कितने अनमोल होते हैं ये अपनों के रिश्ते कोई याद न करे तो भी इंतज़ार रहता है
जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....
तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती
मेरे ज़ज्बात की कदर ही कहाँ, सिर्फ इलज़ाम लगाना ही उनकी फितरत है !!
नींद आएगी तोह इस तरह सोयेंगे मुझे जगाने के लिया लोग रोयेंगे
शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है
कितने अनमोल होते हैं ये अपनों के रिश्ते कोई याद न करे तो भी इंतज़ार रहता है