काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।
तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं.. मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं
ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....
कितने अनमोल होते है, ये यादों के रिश्ते भी, कोई याद ना भी करे, तो चाहत फिर भी रहती है
काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।
तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं.. मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं
ठोकर खाया हुआ दिल है...भीड से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है....
कितने अनमोल होते है, ये यादों के रिश्ते भी, कोई याद ना भी करे, तो चाहत फिर भी रहती है