ऐसा लगता है, कि... मेरे शरीर का हर दूसरा हिस्सा भी अब टूट गया है।
कभी भी अपना दर्द सबको न बतायें क्योंकि सबके घर पर मरहम नहीं होता, मगर नमक हर एक के घर होता है!!
कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.
जो लोग दर्द को समझते हैं वो लोग कभी भी दर्द की वजह नहीं बनते…
हँसते-हँसते जिसने मेरे हर दर्द को संभाला है उसी माँ को मैने कमरे में अकेले रोते पाया है
दर्द तो तब होता है, जब आपको पता चलता है.... कि आप उनके लिए अब उतने ज़रूरी नहीं रहे, जितना की आप कभी हुआ करते थे।
ऐसा लगता है, कि... मेरे शरीर का हर दूसरा हिस्सा भी अब टूट गया है।
कभी भी अपना दर्द सबको न बतायें क्योंकि सबके घर पर मरहम नहीं होता, मगर नमक हर एक के घर होता है!!
कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.
जो लोग दर्द को समझते हैं वो लोग कभी भी दर्द की वजह नहीं बनते…
हँसते-हँसते जिसने मेरे हर दर्द को संभाला है उसी माँ को मैने कमरे में अकेले रोते पाया है
दर्द तो तब होता है, जब आपको पता चलता है.... कि आप उनके लिए अब उतने ज़रूरी नहीं रहे, जितना की आप कभी हुआ करते थे।