कभी भी अपना दर्द सबको न बतायें क्‍योंकि सबके घर पर मरहम नहीं होता, मगर नमक हर एक के घर होता है!!

कभी भी अपना दर्द सबको न बतायें क्‍योंकि सबके घर पर मरहम नहीं होता, मगर नमक हर एक के घर होता है!!

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कभी-कभी दर्द इस हद तक बढ़ जाता है, की "रोते-रोते" सो जाने के अलावा और कोई चारा ही नही बचता।

अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।

डर बुराई की अपेक्षा से उत्पन्न होने वाले दर्द है.

अरस्तु

कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.

जो लोग दर्द को समझते हैं वो लोग कभी भी दर्द की वजह नहीं बनते…

दुःख और सुख, अन्धकार एवं प्रकाश की भांति एक दूसरें के बाद आते रहते है, जो यह जानता है कि उसकी वापसी के प्रति अपने को अनुकूल किस प्रकार बनाया जाए तथा बुद्धिमानी के साथ दुखद पक्ष से अपने को बल पूर्वक छुड़ा सकता है, केवल वही जानता है कि जीवन किस प्रकार जिया जाता हैं.

कभी-कभी दर्द इस हद तक बढ़ जाता है, की "रोते-रोते" सो जाने के अलावा और कोई चारा ही नही बचता।

अब तो ऐसा लगता है की, मैं ही वो अकेला इंसान हूं, जिसने मुझे निराश नहीं किया।

डर बुराई की अपेक्षा से उत्पन्न होने वाले दर्द है.

अरस्तु

कष्ट/दुःख पाप का परिणाम है अथवा दुःख का जन्म पाप से होता है.

जो लोग दर्द को समझते हैं वो लोग कभी भी दर्द की वजह नहीं बनते…

दुःख और सुख, अन्धकार एवं प्रकाश की भांति एक दूसरें के बाद आते रहते है, जो यह जानता है कि उसकी वापसी के प्रति अपने को अनुकूल किस प्रकार बनाया जाए तथा बुद्धिमानी के साथ दुखद पक्ष से अपने को बल पूर्वक छुड़ा सकता है, केवल वही जानता है कि जीवन किस प्रकार जिया जाता हैं.