मुझे ढूंढने की कोशिश अब न किया कर, तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली
जो सूखी टहनियों में नमी बची है ना उसी को याद कहते हैं।
चलो अच्छा हुआ कि धुंध पड़ने लगी दूर तक तकती रहती थी निगाहें उसे।
टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।
दिल जीत ले वो जिगर हम भी रखते है, क़त्ल कर दे वो नज़र हम भी रखते है, वादा किया है किसी को हमेशा मुस्कुराने का, वरना आँखों में समंदर हम भी रखते हैं…
न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।
मुझे ढूंढने की कोशिश अब न किया कर, तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली
जो सूखी टहनियों में नमी बची है ना उसी को याद कहते हैं।
चलो अच्छा हुआ कि धुंध पड़ने लगी दूर तक तकती रहती थी निगाहें उसे।
टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।
दिल जीत ले वो जिगर हम भी रखते है, क़त्ल कर दे वो नज़र हम भी रखते है, वादा किया है किसी को हमेशा मुस्कुराने का, वरना आँखों में समंदर हम भी रखते हैं…
न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।