रुकते तोह सफर रह जाता, चलते तोह हमसफ़र रह जाता

रुकते तोह सफर रह जाता, चलते तोह हमसफ़र रह जाता

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चलो अच्छा हुआ कि धुंध पड़ने लगी दूर तक तकती रहती थी निगाहें उसे।

ला तेरे पैरों पर मरहम लगा दू, कुछ चोट तोह तुझे भी आई होगी मेरे दिल को ठोकर मारने में

न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।

जो आँसू आँख से अचानक निकल पड़ें, वजह उनकी ज़बान से बयां नहीं होती।

अजीब ज़ुल्म करती है तेरी ये यादें.. सोचु तो बिखर जाऊ ना सोचु तो किधर जाऊ

उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता

चलो अच्छा हुआ कि धुंध पड़ने लगी दूर तक तकती रहती थी निगाहें उसे।

ला तेरे पैरों पर मरहम लगा दू, कुछ चोट तोह तुझे भी आई होगी मेरे दिल को ठोकर मारने में

न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।

जो आँसू आँख से अचानक निकल पड़ें, वजह उनकी ज़बान से बयां नहीं होती।

अजीब ज़ुल्म करती है तेरी ये यादें.. सोचु तो बिखर जाऊ ना सोचु तो किधर जाऊ

उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता