उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता

उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता

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बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।

मुझे ढूंढने की कोशिश अब न किया कर, तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली

तुम्हारी याद में आँसू बहाना यूँ भी जरूरी है, रुके दरिया के पानी को तो प्यासा भी नहीं छूता।

काश तुम मौत होते, तोह एक दिन ज़रूर मेरे होते

बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।

बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।

मुझे ढूंढने की कोशिश अब न किया कर, तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली

तुम्हारी याद में आँसू बहाना यूँ भी जरूरी है, रुके दरिया के पानी को तो प्यासा भी नहीं छूता।

काश तुम मौत होते, तोह एक दिन ज़रूर मेरे होते

बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।