टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।
उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।
एक ही शख्स से मतलब था वो भी मतलबी निकला
दुश्मनो से मोहब्बत होने लगी मुझको, जैसे जैसे अपनों को आज़माते चले गए
जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।
बहुत ज्यादा हॅसने और खुश नज़र आने वाले लोग…. अंदर से टूटे होते है
टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।
उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।
एक ही शख्स से मतलब था वो भी मतलबी निकला
दुश्मनो से मोहब्बत होने लगी मुझको, जैसे जैसे अपनों को आज़माते चले गए
जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।
बहुत ज्यादा हॅसने और खुश नज़र आने वाले लोग…. अंदर से टूटे होते है