आज अश्क से आँखों में क्यों हैं आये हुए, गुजर गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए।
जिस “चाँद” के हजारों हो चाहने वाले… दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को….!!
दुश्मनो से मोहब्बत होने लगी मुझको, जैसे जैसे अपनों को आज़माते चले गए
उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों? जिन घड़ियों में हँस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों…
अजीब ज़ुल्म करती है तेरी ये यादें.. सोचु तो बिखर जाऊ ना सोचु तो किधर जाऊ
आज अश्क से आँखों में क्यों हैं आये हुए, गुजर गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए।
जिस “चाँद” के हजारों हो चाहने वाले… दोस्त, वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को….!!
दुश्मनो से मोहब्बत होने लगी मुझको, जैसे जैसे अपनों को आज़माते चले गए
उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों? जिन घड़ियों में हँस सकते है, उन घड़ियों में रोये क्यों…
अजीब ज़ुल्म करती है तेरी ये यादें.. सोचु तो बिखर जाऊ ना सोचु तो किधर जाऊ