जार सी ज़िन्दगी है अरमान बहुत है, हमदर्द कोई नहीं यह, इंसान बहुत है, दिल का दर्द सुनाएं तो सुनाये किसको, जो दिल के करीब है वो अनजान बहुत है.
तुम्हारी याद में आँसू बहाना यूँ भी जरूरी है, रुके दरिया के पानी को तो प्यासा भी नहीं छूता।
वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..
बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।
लिखना तो था कि खुश हूँ तेरे वगैर भी, आँसू मगर कलम से पहले ही गिर पड़े।
चैन मिलता था जिसे आ के पनाहों में मेरी, आज देता है वही अश्क निगाहों में मेरी।
जार सी ज़िन्दगी है अरमान बहुत है, हमदर्द कोई नहीं यह, इंसान बहुत है, दिल का दर्द सुनाएं तो सुनाये किसको, जो दिल के करीब है वो अनजान बहुत है.
तुम्हारी याद में आँसू बहाना यूँ भी जरूरी है, रुके दरिया के पानी को तो प्यासा भी नहीं छूता।
वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..
बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।
लिखना तो था कि खुश हूँ तेरे वगैर भी, आँसू मगर कलम से पहले ही गिर पड़े।
चैन मिलता था जिसे आ के पनाहों में मेरी, आज देता है वही अश्क निगाहों में मेरी।