बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

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दिल जीत ले वो जिगर हम भी रखते है, क़त्ल कर दे वो नज़र हम भी रखते है, वादा किया है किसी को हमेशा मुस्कुराने का, वरना आँखों में समंदर हम भी रखते हैं…

ला तेरे पैरों पर मरहम लगा दू, कुछ चोट तोह तुझे भी आई होगी मेरे दिल को ठोकर मारने में

चैन मिलता था जिसे आ के पनाहों में मेरी, आज देता है वही अश्क निगाहों में मेरी।

उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।

जो सूखी टहनियों में नमी बची है ना उसी को याद कहते हैं।

सपने वो होते है जो सोने नहीं देते, और अपने वो होते है जो रोने नहीं देते…

दिल जीत ले वो जिगर हम भी रखते है, क़त्ल कर दे वो नज़र हम भी रखते है, वादा किया है किसी को हमेशा मुस्कुराने का, वरना आँखों में समंदर हम भी रखते हैं…

ला तेरे पैरों पर मरहम लगा दू, कुछ चोट तोह तुझे भी आई होगी मेरे दिल को ठोकर मारने में

चैन मिलता था जिसे आ के पनाहों में मेरी, आज देता है वही अश्क निगाहों में मेरी।

उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।

जो सूखी टहनियों में नमी बची है ना उसी को याद कहते हैं।

सपने वो होते है जो सोने नहीं देते, और अपने वो होते है जो रोने नहीं देते…