प्यार की लड़ाई में, जिसके दिल में अधिक प्यार रहता है वो हार जाता है
लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी, पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया
जो हैरान है मेरे सब्र पर उनसे कह दो. जो आँसू जमीं पर नहीं गिरते दिल चीर जाते हैं।
आज अश्क से आँखों में क्यों हैं आये हुए, गुजर गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए।
कभी कभी बहुत सताता है यह सवाल मुझे, हम मिले ही क्यों थे, जब हमें मिलना ही नहीं था
ये तो इश्क़ का कोई लोकतंत्र नहीं होता, वरना रिश्वत देके तुझे अपना बना लेते
प्यार की लड़ाई में, जिसके दिल में अधिक प्यार रहता है वो हार जाता है
लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी, पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया
जो हैरान है मेरे सब्र पर उनसे कह दो. जो आँसू जमीं पर नहीं गिरते दिल चीर जाते हैं।
आज अश्क से आँखों में क्यों हैं आये हुए, गुजर गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए।
कभी कभी बहुत सताता है यह सवाल मुझे, हम मिले ही क्यों थे, जब हमें मिलना ही नहीं था
ये तो इश्क़ का कोई लोकतंत्र नहीं होता, वरना रिश्वत देके तुझे अपना बना लेते