बेखबर बेवजह बेरुखी ना किया कर कोई टूट जाता है तेरा लहजा बदलने से ।

बेखबर बेवजह बेरुखी ना किया कर कोई टूट जाता है तेरा लहजा बदलने से ।

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जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।

लिखना तो था कि खुश हूँ तेरे वगैर भी, आँसू मगर कलम से पहले ही गिर पड़े।

मत हो इतना उदास, किसी के लिए इस दुनिया में ऐ दोस्त, क्योंकि उनके लिए जान भी दो, तो कहेंगे इसकी जिंदगी ही इतनी थी…

यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी

तेरी नफ़रत ने ये क्या सिला दिया मुझे.. ज़हर गम-इ-जुदाई का पिला दिया मुझे….

सपने वो होते है जो सोने नहीं देते, और अपने वो होते है जो रोने नहीं देते…

जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।

लिखना तो था कि खुश हूँ तेरे वगैर भी, आँसू मगर कलम से पहले ही गिर पड़े।

मत हो इतना उदास, किसी के लिए इस दुनिया में ऐ दोस्त, क्योंकि उनके लिए जान भी दो, तो कहेंगे इसकी जिंदगी ही इतनी थी…

यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी

तेरी नफ़रत ने ये क्या सिला दिया मुझे.. ज़हर गम-इ-जुदाई का पिला दिया मुझे….

सपने वो होते है जो सोने नहीं देते, और अपने वो होते है जो रोने नहीं देते…