जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।

जब लफ्ज़ थक गए तो फिर आँखों ने बात की, जो आँखें भी थक गयीं तो अश्कों से बात हुई।

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एक ही शख्स से मतलब था वो भी मतलबी निकला

अजीब ज़ुल्म करती है तेरी ये यादें.. सोचु तो बिखर जाऊ ना सोचु तो किधर जाऊ

उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।

यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी

वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..

मत हो इतना उदास, किसी के लिए इस दुनिया में ऐ दोस्त, क्योंकि उनके लिए जान भी दो, तो कहेंगे इसकी जिंदगी ही इतनी थी…

एक ही शख्स से मतलब था वो भी मतलबी निकला

अजीब ज़ुल्म करती है तेरी ये यादें.. सोचु तो बिखर जाऊ ना सोचु तो किधर जाऊ

उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।

यु ही हम दिल साफ़ रखते थे, पता नहीं था क कीमत चेहरे की थी

वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..

मत हो इतना उदास, किसी के लिए इस दुनिया में ऐ दोस्त, क्योंकि उनके लिए जान भी दो, तो कहेंगे इसकी जिंदगी ही इतनी थी…