अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आँसू, अभी छेड़ी कहाँ है दास्तान-ए-ज़िंदगी मैंने।

अभी से क्यों छलक आये तुम्हारी आँख में आँसू, अभी छेड़ी कहाँ है दास्तान-ए-ज़िंदगी मैंने।

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जो आँसू आँख से अचानक निकल पड़ें, वजह उनकी ज़बान से बयां नहीं होती।

जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!

उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।

सोचा ही नहीं था जिंदगी में ऐसे भी फसाने होंगे, रोना भी जरुरी होगा आँसू भी छुपाने होंगे।

बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

अजीब ज़ुल्म करती है तेरी ये यादें.. सोचु तो बिखर जाऊ ना सोचु तो किधर जाऊ

जो आँसू आँख से अचानक निकल पड़ें, वजह उनकी ज़बान से बयां नहीं होती।

जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!

उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।

सोचा ही नहीं था जिंदगी में ऐसे भी फसाने होंगे, रोना भी जरुरी होगा आँसू भी छुपाने होंगे।

बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।

अजीब ज़ुल्म करती है तेरी ये यादें.. सोचु तो बिखर जाऊ ना सोचु तो किधर जाऊ