बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।
तुम्हारी याद में आँसू बहाना यूँ भी जरूरी है, रुके दरिया के पानी को तो प्यासा भी नहीं छूता।
ना जाने आखिर इन आँसूओ पे क्या गुजरी, जो दिल से आँख तक आये मगर बह ना सके।
फिर आज आँसुओं में नहाई हुई है रात, शायद हमारी तरह ही सताई हुई है रात।
तेरी नफ़रत ने ये क्या सिला दिया मुझे.. ज़हर गम-इ-जुदाई का पिला दिया मुझे….
वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..
बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी। अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है।
तुम्हारी याद में आँसू बहाना यूँ भी जरूरी है, रुके दरिया के पानी को तो प्यासा भी नहीं छूता।
ना जाने आखिर इन आँसूओ पे क्या गुजरी, जो दिल से आँख तक आये मगर बह ना सके।
फिर आज आँसुओं में नहाई हुई है रात, शायद हमारी तरह ही सताई हुई है रात।
तेरी नफ़रत ने ये क्या सिला दिया मुझे.. ज़हर गम-इ-जुदाई का पिला दिया मुझे….
वो निभा रही थी मोहब्बत अच्छे से.. कभी इधर... कभी उधर..