बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।

बारिशें हो ही जाती हैं शहर में फ़राज़, कभी बादलों से तो कभी आँखों से।

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जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!

न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।

टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।

दिल से खेलना हमें भी आता है, पर जिस खेल में खिलौना टूट जाए हमें वो खेल पसंद नहीं

मुझे ढूंढने की कोशिश अब न किया कर, तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली

दुश्मनो से मोहब्बत होने लगी मुझको, जैसे जैसे अपनों को आज़माते चले गए

जीवन बहुत छोटा है, अगर हम रोते हैं!

न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे, हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।

टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।

दिल से खेलना हमें भी आता है, पर जिस खेल में खिलौना टूट जाए हमें वो खेल पसंद नहीं

मुझे ढूंढने की कोशिश अब न किया कर, तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली

दुश्मनो से मोहब्बत होने लगी मुझको, जैसे जैसे अपनों को आज़माते चले गए