उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।
दिल से खेलना हमें भी आता है, पर जिस खेल में खिलौना टूट जाए हमें वो खेल पसंद नहीं
निकल जाते हैं तब आँसू जब उनकी याद आती है, जमाना मुस्कुराता है मोहब्बत रूठ जाती है।
समंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तेरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जबसे, कोई भी लफ्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं।
एक ही शख्स से मतलब था वो भी मतलबी निकला
उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता
उसने बस यूँ ही उदासी का सबब पूछा था, मेरी आँखों में सिमट आये समंदर सारे।
दिल से खेलना हमें भी आता है, पर जिस खेल में खिलौना टूट जाए हमें वो खेल पसंद नहीं
निकल जाते हैं तब आँसू जब उनकी याद आती है, जमाना मुस्कुराता है मोहब्बत रूठ जाती है।
समंदर में उतरता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तेरी आँखों को पढ़ता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं, तुम्हारा नाम लिखने की इजाज़त छिन गई जबसे, कोई भी लफ्ज़ लिखता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं।
एक ही शख्स से मतलब था वो भी मतलबी निकला
उपर वाला भी अपना आशिक है, इसिलीऐ तो किसिका होने नहि देता