प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम…

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फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता

ये दिल ही तो जानते हैं मेरी पाक मोहब्बत का आलम, के मुझे जीने के लिए सांसो की नहीं तेरी ज़रूरत हैं.

वाह रे इश्क़ तेरी मासूमियत का जवाब नहीं, हँसा हँसा कर करता है बर्बाद तू मासूम लोगो को.

तरसेगा जब दिल तुम्हारा, मेरी मुलाकात को, ख्वाबों मे होंगे तुम्हारे हम, उसी रात को.

कुछ रिशते ऐसे होते हैं.. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।

मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को, हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।

फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता

ये दिल ही तो जानते हैं मेरी पाक मोहब्बत का आलम, के मुझे जीने के लिए सांसो की नहीं तेरी ज़रूरत हैं.

वाह रे इश्क़ तेरी मासूमियत का जवाब नहीं, हँसा हँसा कर करता है बर्बाद तू मासूम लोगो को.

तरसेगा जब दिल तुम्हारा, मेरी मुलाकात को, ख्वाबों मे होंगे तुम्हारे हम, उसी रात को.

कुछ रिशते ऐसे होते हैं.. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।

मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को, हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।