तेरी मुस्कान, तेरा लहज़ा, और तेरे मासूम से अल्फाज़..और क्या कहूँ... बस बहुत याद आते हो तुम..
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
छोड़ दिया अब हमनें उस बेवफा का इंतजार करना दोस्तों जब रात गुजर सकती है तो ज़िंदगी भी गुजर जाएगी
गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
तेरी मुस्कान, तेरा लहज़ा, और तेरे मासूम से अल्फाज़..और क्या कहूँ... बस बहुत याद आते हो तुम..
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
छोड़ दिया अब हमनें उस बेवफा का इंतजार करना दोस्तों जब रात गुजर सकती है तो ज़िंदगी भी गुजर जाएगी
गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!