साजिशों का पहरा होता है हर वक़्त रिश्ते भी बेचारे क्या करें, टूट जाते हैं बिखर कर...

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उसकी मोहबत पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, दिल करता है के उम्र भर उसका इंतज़ार करू !

वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे

जिन्हें पता होता हैं। की अकेलापन क्या होता हैं । ऐसे लोग दुसरो के लिए । हमेशा हाज़िर रहते हैं ।

"अकेले कैसे रहा जाता है, कुछ लोग यही सिखाने हमारी जिंदगी मे आते है

किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!

क्या गिला करें उन बातों से​ ​क्या शिक़वा करें उन रातों से​​​ ​​कहें भला किसकी खता इसे हम​ ​​कोई खेल गया फिर से जज़बातों से

उसकी मोहबत पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, दिल करता है के उम्र भर उसका इंतज़ार करू !

वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे

जिन्हें पता होता हैं। की अकेलापन क्या होता हैं । ऐसे लोग दुसरो के लिए । हमेशा हाज़िर रहते हैं ।

"अकेले कैसे रहा जाता है, कुछ लोग यही सिखाने हमारी जिंदगी मे आते है

किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!

क्या गिला करें उन बातों से​ ​क्या शिक़वा करें उन रातों से​​​ ​​कहें भला किसकी खता इसे हम​ ​​कोई खेल गया फिर से जज़बातों से