इश्क मुहब्बत क्या है? मुझे नही मालूम! बस तुम्हारी याद आती है… सीधी सी बात है।

इश्क मुहब्बत क्या है? मुझे नही मालूम! बस तुम्हारी याद आती है… सीधी सी बात है।

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दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो; वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती.

रात भर जलता रहा यह दिल उसी की याद में.. समझ नही आता दर्द प्यार करने से होता है या याद करने से

झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!

उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!

वो फिर से लौट आये थे मेरी जिंदगी में’ “अपने मतलब” के लिये, और हम सोचते रहे की हमारी दुआ में दम था !

ऐसा करो, बिछड़ना है तो, रूह से निकल जाओ, रही बात दिल की, उसे हम देख लेंगे.

दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो; वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती.

रात भर जलता रहा यह दिल उसी की याद में.. समझ नही आता दर्द प्यार करने से होता है या याद करने से

झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!

उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!

वो फिर से लौट आये थे मेरी जिंदगी में’ “अपने मतलब” के लिये, और हम सोचते रहे की हमारी दुआ में दम था !

ऐसा करो, बिछड़ना है तो, रूह से निकल जाओ, रही बात दिल की, उसे हम देख लेंगे.