जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.
मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!
झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!
कल रात मैंने अपने दिल से भी रिश्ता तोड़ दिया, पागल तेरे को भूल जाने की सलाह दे रहा था.
तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.
मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!
झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!
कल रात मैंने अपने दिल से भी रिश्ता तोड़ दिया, पागल तेरे को भूल जाने की सलाह दे रहा था.
तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.