धड़कने मेरी बेचैन रहती है आजकल, क्यूंकि तेरे बगैर ये धड़कती कम और तड़पती ज्यादा है.
बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी, आज ज़रा वक़्त पर आना ‘मेहमान-ए-ख़ास’ हो तुम…
मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.
सुनो ना… हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!
रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.
धड़कने मेरी बेचैन रहती है आजकल, क्यूंकि तेरे बगैर ये धड़कती कम और तड़पती ज्यादा है.
बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी, आज ज़रा वक़्त पर आना ‘मेहमान-ए-ख़ास’ हो तुम…
मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.
सुनो ना… हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!
रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.