तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.

तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.

Share:

More Like This

अपना किसी को बनने में देर लगती है, वादा निभाने में बहुत देर लगती है, प्यार तो एक नज़र में भी हो जाता है, मगर उसे भुलाने में उम्र लगती है.

फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता

आज कल वो ? हमसे डिजिटल नफरत ? करते हैं, हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं.

धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.

जिंदगी में कुछ ऐसे लोग भी मिलते हैं, जिन्हें हम पा नही सकते सिर्फ चाह सकते हैं।

में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

अपना किसी को बनने में देर लगती है, वादा निभाने में बहुत देर लगती है, प्यार तो एक नज़र में भी हो जाता है, मगर उसे भुलाने में उम्र लगती है.

फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता

आज कल वो ? हमसे डिजिटल नफरत ? करते हैं, हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं.

धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.

जिंदगी में कुछ ऐसे लोग भी मिलते हैं, जिन्हें हम पा नही सकते सिर्फ चाह सकते हैं।

में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!