तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.

तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.

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आइना कोई ऐसा बना दे ऐ खुदा जो, इंसान का चेहरा नहीं किरदार दिखा दे!

इस बारिश के मौसम में अजीब सी कशिश है ना चाहते हुए भी कोई शिदत से याद आता है.

तरसेगा जब दिल तुम्हारा, मेरी मुलाकात को, ख्वाबों मे होंगे तुम्हारे हम, उसी रात को.

लाकर तेरे क़रीब मुझे दूर कर दिया, तक़दीर भी मेरे साथ एक चाल चल गयी.

तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…

ज़िंदगी तू ही बता कैसे तुझसे प्यार करूँ, तेरी हर एक सुबह मेरी उम्र कम कर देती हैं!

आइना कोई ऐसा बना दे ऐ खुदा जो, इंसान का चेहरा नहीं किरदार दिखा दे!

इस बारिश के मौसम में अजीब सी कशिश है ना चाहते हुए भी कोई शिदत से याद आता है.

तरसेगा जब दिल तुम्हारा, मेरी मुलाकात को, ख्वाबों मे होंगे तुम्हारे हम, उसी रात को.

लाकर तेरे क़रीब मुझे दूर कर दिया, तक़दीर भी मेरे साथ एक चाल चल गयी.

तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…

ज़िंदगी तू ही बता कैसे तुझसे प्यार करूँ, तेरी हर एक सुबह मेरी उम्र कम कर देती हैं!