तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.

तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता.

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अभी ज़िंदा हूँ अभी कुछ साँस बाकी है. आज भी उनके आने की आस बाकी है. मेरे दोस्त मेरा दम यूँ नहीं निकलेगा अभी उन से मुलाक़ात बाकी है

सुना है तुम्हारी एक निगाह से कत्ल होते हैं लोग, एक नज़र हमको भी देख लो.. ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती.

वाह रे इश्क़ तेरी मासूमियत का जवाब नहीं, हँसा हँसा कर करता है बर्बाद तू मासूम लोगो को.

तमन्नाओं की महफिल तो हर कोई सजाता है.. मगर पूरी उसी की होती है यहां साहब..जो लिखाकर लाता है.

हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं, क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा.

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

अभी ज़िंदा हूँ अभी कुछ साँस बाकी है. आज भी उनके आने की आस बाकी है. मेरे दोस्त मेरा दम यूँ नहीं निकलेगा अभी उन से मुलाक़ात बाकी है

सुना है तुम्हारी एक निगाह से कत्ल होते हैं लोग, एक नज़र हमको भी देख लो.. ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती.

वाह रे इश्क़ तेरी मासूमियत का जवाब नहीं, हँसा हँसा कर करता है बर्बाद तू मासूम लोगो को.

तमन्नाओं की महफिल तो हर कोई सजाता है.. मगर पूरी उसी की होती है यहां साहब..जो लिखाकर लाता है.

हम तुम्हें मुफ़्त में जो मिले हैं, क़दर ना करना हक़ है तुम्हारा.

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.