चेहरे “अजनबी” हो जाये तो कोई बात नही, लेकिन रवैये “अजनबी” हो जाये तो बडी “तकलीफ” देते हैं!
दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.
सुनो ना… हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
तुम अपने दिल को बेकरार किया करो, मेरी मोहब्बत पर ऐतबार किया करो, तुमसे जुदा होकर जी नहीं सकूंगा, कभी तुम भी मोहब्बत का इज़हार किया करो
इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !
है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.
चेहरे “अजनबी” हो जाये तो कोई बात नही, लेकिन रवैये “अजनबी” हो जाये तो बडी “तकलीफ” देते हैं!
दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.
सुनो ना… हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
तुम अपने दिल को बेकरार किया करो, मेरी मोहब्बत पर ऐतबार किया करो, तुमसे जुदा होकर जी नहीं सकूंगा, कभी तुम भी मोहब्बत का इज़हार किया करो
इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !
है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.