सुना है तुम्हारी एक निगाह से कत्ल होते हैं लोग, एक नज़र हमको भी देख लो.. ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती.
दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.
तमन्नाओं की महफिल तो हर कोई सजाता है.. मगर पूरी उसी की होती है यहां साहब..जो लिखाकर लाता है.
फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता
तूने फेसले ही फासले बढाने वाले किये थे, वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे…
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है? ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।
सुना है तुम्हारी एक निगाह से कत्ल होते हैं लोग, एक नज़र हमको भी देख लो.. ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती.
दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.
तमन्नाओं की महफिल तो हर कोई सजाता है.. मगर पूरी उसी की होती है यहां साहब..जो लिखाकर लाता है.
फिर नहीं बसते वो दिल जो, एक बार उजड़ जाते है, कब्रें जितनी भी सजा लो पर कोई ज़िंदा नहीं होता
तूने फेसले ही फासले बढाने वाले किये थे, वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे…
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है? ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।