जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
कल रात मैंने अपने दिल से भी रिश्ता तोड़ दिया, पागल तेरे को भूल जाने की सलाह दे रहा था.
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है? ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।
जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।
वो फिर से लौट आये थे मेरी जिंदगी में’ “अपने मतलब” के लिये, और हम सोचते रहे की हमारी दुआ में दम था !
सब तेरी मोहब्बत की इनायत है, वरना मैं क्या मेरा दिल क्या मेरी शायरी क्या.
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
कल रात मैंने अपने दिल से भी रिश्ता तोड़ दिया, पागल तेरे को भूल जाने की सलाह दे रहा था.
खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है? ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।
जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।
वो फिर से लौट आये थे मेरी जिंदगी में’ “अपने मतलब” के लिये, और हम सोचते रहे की हमारी दुआ में दम था !
सब तेरी मोहब्बत की इनायत है, वरना मैं क्या मेरा दिल क्या मेरी शायरी क्या.