दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.
नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।
वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा, मोहब्बत की थी ना?
सुनो ना… हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।
” इश्क में इसलिए भी धोखा खानें लगें हैं लोग दिल की जगह जिस्म को चाहनें लगे हैं लोग..”
दिल मेरा कूछ टूटा हुआ सा है, उससे कूछ रुठा हुआ सा है.
नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।
वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा, मोहब्बत की थी ना?
सुनो ना… हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।
” इश्क में इसलिए भी धोखा खानें लगें हैं लोग दिल की जगह जिस्म को चाहनें लगे हैं लोग..”