किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.
वो बोलते रहे हम सुनते रहे, जवाब आँखों में था वो जुबान में ढूंढते रहे.
रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात ईस पे मैं मरता रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करता रहू.
हाथ की नब्ज़ काट बैठा हूँ, शायद तुम दिल से निकल जाओ ख़ून के ज़रिये.
कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!
ऐसा करो, बिछड़ना है तो, रूह से निकल जाओ, रही बात दिल की, उसे हम देख लेंगे.
किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.
वो बोलते रहे हम सुनते रहे, जवाब आँखों में था वो जुबान में ढूंढते रहे.
रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात ईस पे मैं मरता रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करता रहू.
हाथ की नब्ज़ काट बैठा हूँ, शायद तुम दिल से निकल जाओ ख़ून के ज़रिये.
कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!
ऐसा करो, बिछड़ना है तो, रूह से निकल जाओ, रही बात दिल की, उसे हम देख लेंगे.