है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.
सब तेरी मोहब्बत की इनायत है, वरना मैं क्या मेरा दिल क्या मेरी शायरी क्या.
झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!
चेहरे “अजनबी” हो जाये तो कोई बात नही, लेकिन रवैये “अजनबी” हो जाये तो बडी “तकलीफ” देते हैं!
मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.
सुनो ना… हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?
है कोई वकील इस जहान में, जो हारा हुआ इश्क जीता दे मुझको.
सब तेरी मोहब्बत की इनायत है, वरना मैं क्या मेरा दिल क्या मेरी शायरी क्या.
झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम ये उन दिनों की बात है, जब बच्चे थे हम!
चेहरे “अजनबी” हो जाये तो कोई बात नही, लेकिन रवैये “अजनबी” हो जाये तो बडी “तकलीफ” देते हैं!
मुझे गरुर था उसकी मोह्ब्बत पर, वो अपनी शोहरत मे हमे भूल गया.
सुनो ना… हम पर मोहब्बत नही आती तुम्हें, रहम तो आता होगा?