तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…
अपना किसी को बनने में देर लगती है, वादा निभाने में बहुत देर लगती है, प्यार तो एक नज़र में भी हो जाता है, मगर उसे भुलाने में उम्र लगती है.
सालो लग जाते प्यार वाले जख्म भरने में
सब तेरी मोहब्बत की इनायत है, वरना मैं क्या मेरा दिल क्या मेरी शायरी क्या.
तुम्हे ना पाना शायद बेहतर है, पा के फिर से तुम्हे गवाने से.
बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी, आज ज़रा वक़्त पर आना ‘मेहमान-ए-ख़ास’ हो तुम…
तेरे बिना में ये दुनिया छोड तो दूं, पर उसका दिल कैसे दुखा दुं, जो रोज दरवाजे पर खडी केहती हे बेटा घर जल्दी आ जाना…
अपना किसी को बनने में देर लगती है, वादा निभाने में बहुत देर लगती है, प्यार तो एक नज़र में भी हो जाता है, मगर उसे भुलाने में उम्र लगती है.
सालो लग जाते प्यार वाले जख्म भरने में
सब तेरी मोहब्बत की इनायत है, वरना मैं क्या मेरा दिल क्या मेरी शायरी क्या.
तुम्हे ना पाना शायद बेहतर है, पा के फिर से तुम्हे गवाने से.
बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी, आज ज़रा वक़्त पर आना ‘मेहमान-ए-ख़ास’ हो तुम…