वो पिला कर जाम लबों से अपनी मोहब्बत का, अब कहते हैं नशे की आदत अच्छी नहीं होती!!
उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!
हम न पा सके तुझे मुद्दतो से चाहने के बाद, और किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमें निभाने क बाद.
मैंने पूछा उनसे, भुला दिया मुझको कैसे, चुटकियाँ बजा के वो बोली ऐसे, ऐसे, ऐसे!!
धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.
इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !
वो पिला कर जाम लबों से अपनी मोहब्बत का, अब कहते हैं नशे की आदत अच्छी नहीं होती!!
उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!
हम न पा सके तुझे मुद्दतो से चाहने के बाद, और किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमें निभाने क बाद.
मैंने पूछा उनसे, भुला दिया मुझको कैसे, चुटकियाँ बजा के वो बोली ऐसे, ऐसे, ऐसे!!
धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर, हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता.
इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर !