वो कहती है की बहुत मजबूरियां है मेरी, साफ़ शब्दों में खुद को “बेवफ़ा” नहीं कहती.
कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!
दोस्तों कभी किसी से प्यार ना करना, कभी किसी का ऐतबार ना करना, लेकर खंजर अपने ही हाथों में, यूँ अपने दिल पर कभी वार ना करना
रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.
कौन कहता है की सिर्फ चोट ही दर्द देता है असली दर्द मुझे तब होता है जब तू Online आके भी Reply नहीं देती…
वाह रे इश्क़ तेरी मासूमियत का जवाब नहीं, हँसा हँसा कर करता है बर्बाद तू मासूम लोगो को.
वो कहती है की बहुत मजबूरियां है मेरी, साफ़ शब्दों में खुद को “बेवफ़ा” नहीं कहती.
कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!
दोस्तों कभी किसी से प्यार ना करना, कभी किसी का ऐतबार ना करना, लेकर खंजर अपने ही हाथों में, यूँ अपने दिल पर कभी वार ना करना
रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.
कौन कहता है की सिर्फ चोट ही दर्द देता है असली दर्द मुझे तब होता है जब तू Online आके भी Reply नहीं देती…
वाह रे इश्क़ तेरी मासूमियत का जवाब नहीं, हँसा हँसा कर करता है बर्बाद तू मासूम लोगो को.