इश्क मुहब्बत क्या है? मुझे नही मालूम! बस तुम्हारी याद आती है… सीधी सी बात है।
माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.
कितने दर्दनाक थे वो मंजर जब हम बिछड़े थे उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं.
रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात ईस पे मैं मरता रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करता रहू.
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा गुनाह करना हैं!
इश्क मुहब्बत क्या है? मुझे नही मालूम! बस तुम्हारी याद आती है… सीधी सी बात है।
माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.
कितने दर्दनाक थे वो मंजर जब हम बिछड़े थे उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं.
रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात ईस पे मैं मरता रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करता रहू.
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा गुनाह करना हैं!