कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.
अमीर तो हम भी बहुत थे, पर दॊलत सिर्फ दिल की थी खर्च भी बहुत किया ए दोस्त, पर दुनिया मे गिनती सिर्फ नोटों की हुई
सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम, कभी वो बी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते.
एक हसरत थी की कभी वो भी हमे मनाये..पर ये कम्ब्खत Dil कभी उनसे रूठा ही नही.
उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!
उसे किस्मत समझ कर सीने से लगाया था, भूल गए थे के किस्मत बदलते देर नहीं लगती।
कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के, ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.
अमीर तो हम भी बहुत थे, पर दॊलत सिर्फ दिल की थी खर्च भी बहुत किया ए दोस्त, पर दुनिया मे गिनती सिर्फ नोटों की हुई
सुना है काफी पढ़ लिख गए हो तुम, कभी वो बी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते.
एक हसरत थी की कभी वो भी हमे मनाये..पर ये कम्ब्खत Dil कभी उनसे रूठा ही नही.
उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!
उसे किस्मत समझ कर सीने से लगाया था, भूल गए थे के किस्मत बदलते देर नहीं लगती।