आइना कोई ऐसा बना दे ऐ खुदा जो, इंसान का चेहरा नहीं किरदार दिखा दे!

आइना कोई ऐसा बना दे ऐ खुदा जो, इंसान का चेहरा नहीं किरदार दिखा दे!

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उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!

अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।

में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है? ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।

ये दिल ही तो जानते हैं मेरी पाक मोहब्बत का आलम, के मुझे जीने के लिए सांसो की नहीं तेरी ज़रूरत हैं.

मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!

उसने कहा था आँख भरके देखा करो, अब आँख भर आती हैं पर वो नज़र नहीं आती!

अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।

में क्यों पुकारू उसे की लौट आओ, क्या उसे खबर नहीं की कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाय!

खो जाओ मुझ में तो मालूम हो कि दर्द क्या है? ये वो किस्सा है जो जुबान से बयाँ नही होता।

ये दिल ही तो जानते हैं मेरी पाक मोहब्बत का आलम, के मुझे जीने के लिए सांसो की नहीं तेरी ज़रूरत हैं.

मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!