हमे जब नींद आएगी तो इस कदर सोएंगे के लोग रोएंगे हमे जगाने के लिए!

हमे जब नींद आएगी तो इस कदर सोएंगे के लोग रोएंगे हमे जगाने के लिए!

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हाथ की नब्ज़ काट बैठा हूँ, शायद तुम दिल से निकल जाओ ख़ून के ज़रिये.

लाकर तेरे क़रीब मुझे दूर कर दिया, तक़दीर भी मेरे साथ एक चाल चल गयी.

उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!

अभी ज़िंदा हूँ अभी कुछ साँस बाकी है. आज भी उनके आने की आस बाकी है. मेरे दोस्त मेरा दम यूँ नहीं निकलेगा अभी उन से मुलाक़ात बाकी है

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!

हाथ की नब्ज़ काट बैठा हूँ, शायद तुम दिल से निकल जाओ ख़ून के ज़रिये.

लाकर तेरे क़रीब मुझे दूर कर दिया, तक़दीर भी मेरे साथ एक चाल चल गयी.

उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!

अभी ज़िंदा हूँ अभी कुछ साँस बाकी है. आज भी उनके आने की आस बाकी है. मेरे दोस्त मेरा दम यूँ नहीं निकलेगा अभी उन से मुलाक़ात बाकी है

किसी ने धूल क्या झोंकी आखों में, पहले से बेहतर दिखने लगा है.

मोहब्बत ज़िंदगी बदल देती है, मिल जाए तो भी ना मिले तो भी..!!