तुम अपने दिल को बेकरार किया करो, मेरी मोहब्बत पर ऐतबार किया करो, तुमसे जुदा होकर जी नहीं सकूंगा, कभी तुम भी मोहब्बत का इज़हार किया करो
मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को, हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।
कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!
चेहरे “अजनबी” हो जाये तो कोई बात नही, लेकिन रवैये “अजनबी” हो जाये तो बडी “तकलीफ” देते हैं!
इस बारिश के मौसम में अजीब सी कशिश है ना चाहते हुए भी कोई शिदत से याद आता है.
कुछ रिशते ऐसे होते हैं.. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।
तुम अपने दिल को बेकरार किया करो, मेरी मोहब्बत पर ऐतबार किया करो, तुमसे जुदा होकर जी नहीं सकूंगा, कभी तुम भी मोहब्बत का इज़हार किया करो
मत खोल मेरी किस्मत की क़िताब को, हर उस सख़्श ने दिल दुखाया जिस पर नाज़ था ।
कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!
चेहरे “अजनबी” हो जाये तो कोई बात नही, लेकिन रवैये “अजनबी” हो जाये तो बडी “तकलीफ” देते हैं!
इस बारिश के मौसम में अजीब सी कशिश है ना चाहते हुए भी कोई शिदत से याद आता है.
कुछ रिशते ऐसे होते हैं.. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।