ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही

ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही

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बहुत शौक से उतरे थे इश्क के समुन्दर में.. पहली ही लहर ने ऐसा डुबोया कि आज तक किनारा ना मिला

वो शख्स एक छोटी सी बात पे यूँ चल दिया, जैसे उसे सदियों से किसी बहाने की तलाश थी .

तुम हो तोह कुछ कमी नहीं .... तुम नहीं तोह कुछ नहीं ..

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??

नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.

कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं.. मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं

बहुत शौक से उतरे थे इश्क के समुन्दर में.. पहली ही लहर ने ऐसा डुबोया कि आज तक किनारा ना मिला

वो शख्स एक छोटी सी बात पे यूँ चल दिया, जैसे उसे सदियों से किसी बहाने की तलाश थी .

तुम हो तोह कुछ कमी नहीं .... तुम नहीं तोह कुछ नहीं ..

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??

नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.

कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं.. मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं