ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही

ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही

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जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....

कमाल करता है ऐ दिल तू भी उसे फुर्सत नहीं और तुझे चैन नहीं

सब ख़फ़ा है मेरे लहजे से...पर मेरे हाल से कोई रूबरू तक न हुआ.....

बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।

कभी टूटा नहीं मेरे दिल से तेरी यादों का रिश्ता.. गुफ़्तगू किसी से भी हो ख़याल तेरा ही रहता है..

सब कुछ ठीक ही चल रहा है ना जाने क्यों उदास हु मैं

जो होकर भी ना हो.. उसका होना कैसा... नाम के रिश्तों से शिकवा कैसा..रोना कैसा....

कमाल करता है ऐ दिल तू भी उसे फुर्सत नहीं और तुझे चैन नहीं

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कभी टूटा नहीं मेरे दिल से तेरी यादों का रिश्ता.. गुफ़्तगू किसी से भी हो ख़याल तेरा ही रहता है..

सब कुछ ठीक ही चल रहा है ना जाने क्यों उदास हु मैं