रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.
बहुत देर करदी तुमने मेरी धडकनें महसूस करने में. वो दिल नीलाम हो गया, जिस पर कभी हकुमत तुम्हारी थी.
तरस गए हैं तेरे Muh से कुछ सुनने को हम, Pyaar की बात न सही कोई शिकायत ही कर दे..!!
रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।
उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!
वो फिर से लौट आये थे मेरी जिंदगी में’ “अपने मतलब” के लिये, और हम सोचते रहे की हमारी दुआ में दम था !
रिश्तों में इतनी बेरुखी भी अच्छी नहीं हुजूर, देखना कही मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे.
बहुत देर करदी तुमने मेरी धडकनें महसूस करने में. वो दिल नीलाम हो गया, जिस पर कभी हकुमत तुम्हारी थी.
तरस गए हैं तेरे Muh से कुछ सुनने को हम, Pyaar की बात न सही कोई शिकायत ही कर दे..!!
रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो, बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।
उसने महबूब ही तो बदला है ताज्जूब कैसा, दूआ कबूल ना हो तो लोग खूदा भी बदल लेते हैं !!
वो फिर से लौट आये थे मेरी जिंदगी में’ “अपने मतलब” के लिये, और हम सोचते रहे की हमारी दुआ में दम था !