जिसको आज मुझमें हज़ारों गलतियां नज़र आती है, कभी उसी ने कहा था “तुम” जैसे भी हो…मेरे हो…।

जिसको आज मुझमें हज़ारों गलतियां नज़र आती है, कभी उसी ने कहा था “तुम” जैसे भी हो…मेरे हो…।

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जरा ठहर ऐ जिंदगी तुझे भी सुलझा दूंगा, पहले उसे तो मना लूं जिसकी वजह से तू उलझी है.

बारिश की बूँदों में झलकती है तस्वीर उनकी‬‎ और हम उनसे मिलनें की चाहत में भीग जाते हैं‬…

रूठा अगर तुझसे तो इस अंदाज से रूठूंगा, तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे बजूद को तरसेगी.

वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा, मोहब्बत की थी ना?

अभी ज़िंदा हूँ अभी कुछ साँस बाकी है. आज भी उनके आने की आस बाकी है. मेरे दोस्त मेरा दम यूँ नहीं निकलेगा अभी उन से मुलाक़ात बाकी है

कुछ रिशते ऐसे होते हैं.. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।

जरा ठहर ऐ जिंदगी तुझे भी सुलझा दूंगा, पहले उसे तो मना लूं जिसकी वजह से तू उलझी है.

बारिश की बूँदों में झलकती है तस्वीर उनकी‬‎ और हम उनसे मिलनें की चाहत में भीग जाते हैं‬…

रूठा अगर तुझसे तो इस अंदाज से रूठूंगा, तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे बजूद को तरसेगी.

वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह फिर हल्का सा मुस्कराया, और कहा, मोहब्बत की थी ना?

अभी ज़िंदा हूँ अभी कुछ साँस बाकी है. आज भी उनके आने की आस बाकी है. मेरे दोस्त मेरा दम यूँ नहीं निकलेगा अभी उन से मुलाक़ात बाकी है

कुछ रिशते ऐसे होते हैं.. जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।