ऐ जिंदगी ख़त्म कर अब ये तमासा♫ मैं थक गया हूँ दिल को तसल्लियाँ देते देते

ऐ जिंदगी ख़त्म कर अब ये तमासा♫ मैं थक गया हूँ दिल को तसल्लियाँ देते देते

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हाथ की नब्ज़ काट बैठा हूँ, शायद तुम दिल से निकल जाओ ख़ून के ज़रिये.

जरूरत और चाहत में बहुत फ़र्क है, कमबख्त़ इसमे तालमेल बिठाते बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है!

ऐसा करो, बिछड़ना है तो, रूह से निकल जाओ, रही बात दिल की, उसे हम देख लेंगे.

हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर.

कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!

अमीर तो हम भी बहुत थे, पर दॊलत सिर्फ दिल की थी खर्च भी बहुत किया ए दोस्त, पर दुनिया मे गिनती सिर्फ नोटों की हुई

हाथ की नब्ज़ काट बैठा हूँ, शायद तुम दिल से निकल जाओ ख़ून के ज़रिये.

जरूरत और चाहत में बहुत फ़र्क है, कमबख्त़ इसमे तालमेल बिठाते बिठाते ज़िन्दगी गुज़र जाती है!

ऐसा करो, बिछड़ना है तो, रूह से निकल जाओ, रही बात दिल की, उसे हम देख लेंगे.

हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं, हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर.

कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!

अमीर तो हम भी बहुत थे, पर दॊलत सिर्फ दिल की थी खर्च भी बहुत किया ए दोस्त, पर दुनिया मे गिनती सिर्फ नोटों की हुई