कभी टूट कर बिखरो तो मेरे पास आ जाना, मुझे अपने जैसे लोग बहुत पसंद हैं
आज कल वो ? हमसे डिजिटल नफरत ? करते हैं, हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं.
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है, हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है।
अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।
जिंदगी मेरे कानो मे अभी होले से कुछ कह गई, उन रिश्तो को संभाले रखना जिनके बिन गुज़ारा नहीं होता!!
दर्द तो तब होता है जब हमें किसी से प्यार हो और उनके दिल में कोई और हो
कभी टूट कर बिखरो तो मेरे पास आ जाना, मुझे अपने जैसे लोग बहुत पसंद हैं
आज कल वो ? हमसे डिजिटल नफरत ? करते हैं, हमें ऑनलाइन देखते ही ऑफलाइन हो जाते हैं.
फ़रिश्ते ही होंगे जिनका इश्क मुकम्मल होता है, हमने तो यहाँ इंसानों को बस बर्बाद होते देखा है।
अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।
जिंदगी मेरे कानो मे अभी होले से कुछ कह गई, उन रिश्तो को संभाले रखना जिनके बिन गुज़ारा नहीं होता!!
दर्द तो तब होता है जब हमें किसी से प्यार हो और उनके दिल में कोई और हो